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भारत की आर्थिक समस्या और समाधान- बजरंग मुनि
कुछ सर्व स्वीकृति सिद्धान्त है 1 पूरी दुनिया तेज गति से भौतिक उन्नति कर रही है और उतनी ही तेज गति से नैतिक पतन हो रहा है। 2 प्राचीन समय मे भारत विचारों का भी निर्यात करता था तथा आर्थिक दृष्टि से...
मंथन क्रमांक- 61 नई अर्थनीति-‎बजरंग मुनि
कुछ सर्वस्वीकृत सिद्धांत हैं- 1 राज्य का एक ही दायित्व होता है जानमाल की सुरक्षा। अन्य सभी कार्य राज्य के कर्तव्य होते है, दायित्व नहीं। 2 सम्पत्ति प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार होता है ब...
मंथन क्रमांक 60 कन्या भ्रूण हत्या कितनी समस्या और कितना समाधान-बजरंग मुनि
कुछ स्वयं सिद्ध सिद्धांत हैं- (1) समस्याओं के तीन प्रकार के समाधान दिखते है-(1) प्राकृतिक (2) सामाजिक (3) संवैधानिक। अधिकांश समस्याओं के प्राकृतिक समाधान होते हैं। सामाजिक समाधान कुछ विकृति पैदा ...

भारत की सर्वाधिक घातक समस्या क्या ?

Posted By: admin on February 20, 2016 in rajnitik - Comments: No Comments »

भारत में कुल 11 समस्याएॅ लगातार बढ़ रही हैं-1-चोरी, डकैती, लूट।2-बलात्कार 3-मिलावट,कमतौलना 4-जालसाजी,धोखाधडी 5-हिंसा, आतंक और बलप्रयोग 6-चरित्रपतन 7-भ्रष्टाचार 8-साम्प्रदायिकता 9-जातीय कटुता 10-आर्थिक असमानता 11-श्रम शोषण
यद्यपि ये सभी समस्याएॅ लगभग समान गति से स्वतंत्रता के बाद लगातार बढ़ रही है तथा इनके घटने के अभी कोई मार्ग नहीं दिख रहे, किन्तु इनमें भी छः समस्याएॅ विषेश रुप से घातक है । 1 हिन्दुत्व का घटता मनोबल 2 हिंसा पर बढ़ता विश्वास 3 स्वार्थभाव वृद्धि 4 आर्थिक विषमता 5 चरित्रपतन 6 केन्द्रीयकरण। नीति शास्त्र के अनुसार तीन का केन्द्रीयकरण घातक होता है-1 सम्मान का नैतिकता से हटकर बुद्धिजीवीयों के पास बढ़ना 2 धन सम्पत्ति का श्रम से हटकर पूॅजीपतियों के पास इक्ट्ठा होना। 3 शक्ति का समाज से निकल कर राजनीति के पास इक्ट्ठा होना।
वर्तमान भारत में सबसे खतरनाक स्थिति यह बन गई है कि धन सम्मान तथा शक्ति , अर्थात् तीनों शक्तियाॅ राजनेताओं के पास केन्द्रित हो गई हैं। अर्थात् सम्पत्ति के मामले में भी राजनेता सबसे आगे निकलने का प्रयास कर रहा है तो सम्मान के मामले में भी तथा शक्ति तो स्वाभाविक रुप से उसके पास है ही। इस तरह इन तीनों का एक जगह केन्द्रित होना एक प्रकार से समाज को गुलाम बनाने की स्थिति तक आ गया है, जिसे हम सामाजिक आपातकाल की स्थिति भी कह सकते है ।
इस आपातकाल के समाधान के लिए हमें कुछ प्रयत्न करने होंगे-1 सम्मान को नैतिकता के साथ जोडने का प्रयास 2 सुविधा को धन के साथ जोडना। 3 सिर्फ शक्ति राजनेताओं के पास रहे। इस तरह सम्मान और धन को राजनीति के प्रभाव से मुक्त करने का प्रयास होना चाहिए। यदि यहाॅ से प्रांरभ करेंगे तो राजनैतिक शक्ति का केन्द्रीयकरण कम होगा, तथा सामाजिक शक्ति आंशिक रुप से मजबूत होगी। यदि इन तीनों शक्तियों का अलग अलग केन्द्रीयकरण किसी सीमा रेखा को तोड़ता है तो सामाजिक शक्ति सबको अनुशासित करे। सामाजिक शक्ति भी किसी व्यक्ति या व्यक्ति समूह के पास संग्रहित न होकर परिवार, गाॅव, जिला, प्रदेश , देश और समाज तक विभाजित हो। इसका अर्थ है कि प्रत्येक इकाई अपने आंतरिक मामलों में स्वतंत्र हो तथा अपने से उपर वाली इकाई की सहायक हो। साथ ही उपर वाली इकाई से अनुशासित भी हो। मेरा सुझाव है कि हम आप सबको अलग अलग समस्याओं के समाधान के साथ साथ इस एक समस्या अर्थात् राजनैतिक शक्ति के विकेन्द्रीयकरण के विरुद्ध एक साथ शक्ति लगानी चाहिए।

Posted By: admin on February 8, 2016 in Uncategorized - Comments: Comments Off

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एन्डरसन को फंसी दी जनि चाहिए या नहीं ?

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क्या हमारे पास वोट देने के अलावा ऐसा कोई अधिकार है जिन्हें संसद हमसे छीन सकती है?

संसद अपनी आवश्यकता अनुसार जब चाहे हमारे सारे अधिकार छीन सकती है जैसा की इन्द्रा जी ने आपातकाल लगा कर किया था|

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