Lets change India
मंथन क्रमांक 39 अर्थ पालिका, एक व्यावहारिक सुझाव
दुनियां में साम्प्रदायिकता, धन और उच्श्रृंखलता के बीच बड़ी होड़ मची हुई है। तीनों ही येन केन प्रकारेण राज्य शक्ति के साथ अधिक से अधिक जुड़कर दुनियां में सबसे आगे निकलने की कोषिष कर रहे हंै। उच्श...
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परिवार में शामिल प्रत्येक व्यक्ति के परिवार में रहते तक सामाजिक संवैधानिक तथा प्राकृतिक अधिकार शून्यवत् हो जाते हैं ।क्या आप इससे सहमत हैं?
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न्यायपालिका

Posted By: admin on May 27, 2016 in Recent Topics - Comments: No Comments »

Law

व्यक्ति तथा ना गरिक की भूमिकाएॅ अलग अलग होती है, भले ही दोनों का संचालक एक ही होता हैं। व्यक्ति समाज का अंग होता है तो नागरिक राष्ट्र का। व्यक्ति के रूप में उसे मौलिक तथा सामाजिक अधिकार प्राप्त होते है तो नागरिक के रूप में संवैधानिक । किसी व्यक्ति के संवैधानिक अधिकार छीन लेने के बाद भी उसके मौलिक तथा सामाजिक अधिकार रह सकते हैं।

प्रत्येक व्यक्ति के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा तथा उच्चश्रृंखलता पर नियंत्रण तंत्र का दायित्व होता है तथा समाज का कर्तव्य। समाज उच्चश्रृखलता को सिर्फ अनुशासित ही कर सकता है, नियंत्रित नहीं। क्योंकि समाज को दंडित करने का अधिकार नहीं है। लोक तंत्र में तंत्र तीन इकाइयों के तालमेल से अपना काम करता हैं- 1 विधायक 2 न्यायपालिका 3 कार्यपालिका। प्रत्येक व्यक्ति के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा ही उसके प्रति न्याय है तथा उच्चश्रृखलता पर नियंत्रण ही उसकी व्यवस्था। विधायिका न्याय को परिभाषित करती है , न्यायपालिका उक्त परिभाषा के अनुसार न्याय और दण्ड की मात्रा तय करती है तथा कार्यपालिका न्यायालय के निर्णय अनुसार कार्यान्वयन करती है। व्यक्ति के मौलिक अधिकारों की संपूर्ण सुरक्षा न्यायालय का महत्वपूर्ण दायित्व हैं । यदि ऐसी असुरक्षा किसी व्यक्ति से हो तो न्यायालय तंत्र की अन्य इकाइयों के साथ मिलकर सुरक्षा देता है। और यदि असुरक्षा तंत्र के ही किसी भाग से हो तो न्यायालय संविधान के अनुसार उसकी सुरक्षा करता है और यदि संविधान भी ऐसे मौलिक अधिकारों के विरूद्ध कुछ करे तो न्यायालय ऐसे संविधान संशोधन को भी अमान्य कर सकता है।

व्यक्ति के मौलिक अधिकारो की सुरक्षा की व्यवस्था के साथ साथ न्यायपालिका व्यक्ति के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा में भी सक्रिय रहती हैं। यद्यपि मौलिक अधिकारों की सुरक्षा न्यायालय का दायित्व है तो संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा उसका स्वैच्छिक कर्तव्य।
नई व्यवस्था में निम्न संशोधन प्रस्तावित है-
1 पश्चिम की न्याय की अवधारणा है कि चाहे सौ अपराधी छूट जाये किन्तु एक भी निरपराध दडिंत न हो । इसे बदलकर इस तरह किया जायगा कि न कोई निरपराध दंडित हो, न कोई अपराधी छूट सके।
2 प्रशिक्षण कैंप लगाकर न्यायाधीशो को प्रशिक्षित किया जायगा कि ( क) वे अपराध गैर कानूनी तथा अनैतिक का अंतर समझे।
( ख) वे पुलिस द्वारा सिद्ध अपराधी को न्यायिक प्रक्रिया चलते तक संदिग्ध माने, निर्दोष नहीं।
( ग) वे पुलिस को न्याय सहायक समझे, पक्षकार नही।
( घ) वे अपनी सीमाएं समझें जिसके अनुसार वे किसी व्यक्ति को सीधा न्याय नहीं दे सकते ,बल्कि कानून के अनुसार ही फैसला करने तक सीमित हैं। यदि कोई कानून गलत है तो वे कानून को रदद कर सकते है और संविधान की धाराएं भी रदद कर सकते है किन्तु निर्णय करते समय जो कानून हैं, न्यायालय उसके विरूद्ध नहीं जा सकते।
(च ) न्यायपालिका किसी कानून या संवैधानिक प्रावधान को रदद कर सकती है किन्तु कोई कानून बना नहीं सकती।
( छ) न्यायपालिका न तो जनहित को परिभाषित कर सकेगी न ही जनहित याचिकाएं सुन सकती हैं।
3 न्यायपालिका किसी भी सामाजिक मामले में कभी कोई दखल नहीं दे सकती । वर्तमान में न्यायालय में लम्बित ऐसे करोडो मुकदमे तुरंत समाप्त हों जायेंगे।
4 न्यायपालिका पांच प्रकार के अपराधो से जुडें मामले प्राथमिकता के स्तर पर देखेगी।
5 अधिकांष न्यायिक प्रकरण तो परिवार, गांव, स्तर तक ही निपट जायेंगे, कुछ ही मामले न्यायालय तक जायेंगे।
6 किसी भी आपराधिक मामले का अंतिम निर्णय जिला जज ही करेंगे। कोई अपील होने पर उच्च न्यायालय उक्त लोक प्रदेश के या विशेष स्थिति में किसी भी अन्य जिला जज या जिला जजो की टीम को पुनःपरीक्षण या पुनः विचार हेतु भेज सकता है किन्तु निर्णय उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय नहीं दे सकता। उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय अन्य कानूनी या संवैधानिक मामलो तक सीमित रहेंगे।
7 पांच प्रकार के अपराधों में संलिप्त मुकदमों में दोष सिद्धि का भार अभियुक्त पर होगा। सबसे पहले अभियुक्त के बयान होंगे तथा पुलिस या न्यायालय उससे जिरह कर सकेगा।
8 न्यायालय में सच बोलने वाले और झूठ बोलने वाले अभियुक्त के दंड में युक्ति संगत इतना फर्क किया जायगा कि न्यायालय में सच बोलने की प्रवृत्ति प्रोत्साहित हो।
9 किसी भी मामले में कानून अधिकतम दंड निर्धारित कर सकता है किन्तु न्यूनतम दंड नहीं। न्युनतम दण्ड की मात्रा न्यायालय पर निर्भर होंगी।
10 किसी मामले में अनावश्यक अपील करने वालो से भारी अर्थदंड लिया जायेगा।

परिवार व्यवस्था

Posted By: admin on May 26, 2016 in Recent Topics - Comments: No Comments »

Family-1अब तक परिवार को प्राकृतिक इकाई माना जाता रहा है जो मेरे विचार में गलत है । परिवार एक संगठन हैं, प्राकृतिक इकाई नही। व्यक्ति से लेकर समाज तक व्यवस्था के दो क्रम प्रचलित रहे हैं। 1 व्यक्ति परिवार, गांव जिला प्रदेश , देश , विश्व, 2 व्यक्ति, परिवार , कुटुम्ब , जाति, वर्ण धर्म, राष्ट्र, समाज। पहली व्यवस्था मुख्य रूप से संवैधानिक या राजनैतिक है और दूसरी सामाजिक किन्तु भारत के संविधान निर्माताओं ने ना समझी में दूसरी व्यवस्था को संवैधानिक मान लिया तथा पहली को सामाजिक । व्यक्ति के मूल अधिकारों की सुरक्षा राज्य का दायित्व है और राज्य इन इकाइयों के माध्यम से सुरक्षा और न्याय का कार्य करता है जबकि व्यक्ति को ठीक दिशा में चलने की ट्रेनिग देना समाज का काम है तथा समाज दूसरे क्रम के माध्यम से इस काम को करता रहा है । चूकि सत्तर वर्षो मे पूरी व्यवस्था अस्त व्यस्त हो चुकी है तथा अनेक शब्द भी अपना भावार्थ बदल चुके है इसलिये अब दूसरे क्रम को पूरी तरह छोड कर पहले क्रम में ही राज्य और समाज को एकाकार हो जाना चाहिये । वैसे भी दोनां ही क्रमो में परिवार व्यवस्था शामिल रही है, किन्तु पता नही हमारे संविधान बनाने वालो ने क्या सोचकर परिवार को बाहर किया । संभव है कि पश्चिम की व्यवस्था में परिवार को महत्व न होने से इन्होने भी आंख बंद करके नकल कर दी।
परिवार की एक परिभाषा होगी ‘‘संयुक्त सम्पत्ति तथा संयुक्त उत्तर दायित्व के आधार पर एक साथ रहने के लिये सहमत व्यक्तियों का पंजीकृत समूह‘‘। किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत सम्पत्ति नहीं होगी। परिवार से पृथक होते समय व्यक्ति परिवार की सदस्य संख्या के आधार पर हिस्सा लेकर अलग होगा तथा नये परिवार में सम्मिलित करेगा। यदि कोई व्यक्ति किसी परिवार का सदस्य नही होगा तो वह ग्राम परिवार में अपनी सम्पत्ति अमानत रखेगा, जिसे वह तब तक खर्च नहीं कर सकता जब तक वह किसी परिवार का सदस्य न हो जावे । यदि किसी परिवार का कोई सदस्य कोई अपराध करता है, तथा यह प्रमाणित हो जाता है कि परिवार ने जानते हुए भी न रोका न उसे अलग किया तो परिवार को भी इसमे दोषी माना जा सकता है। परिवार अपने अधिकार तथा कार्य प्रणाली स्वयं तय करेगा किन्तु यह ध्यान रखेगा कि अपने परिवार के किसी सदस्य की सहमति के बिना उसके मौलिक अधिकारों की सीमा न टूटे तथा किसी अन्य परिवार अथवा राज्य की सीमाओं का भी अति क्रमण न हो। परिवार का कोई भी सदस्य कभी भी परिवार छोड सकता है या निकाला जा सकता है। यदि परिवार का कोई सदस्य राज्य अथवा समाज की किसी इकाई के पास परिवार के विरूद्ध कोई शिकायत करता है तो उसे तत्काल परिवार की सदस्यता छोडनी होगी किन्तु कोई किसी सामाजिक इकाई से सलाह या निवेदन कर सकता है । परिवार का प्रत्येक सदस्य पंजीकृत होगा। यदि कोई बालक जन्म लेता है तो वह बालक उस परिवार का सदस्य होगा, जिस परिवार की उसकी मां पंजीकृत सदस्य होगी। यदि दस वर्ष से कम उम्र का बालक परिवार छोडता है या निकाला जाता है तो उसकी सम्पत्ति ग्राम सभा के पास अमानत होगी। उसकी व्यवस्था ग्राम सभा करेगी।
परिवार में किसी भी स्तर पर उम्र या लिंग का भेद नहीं होगा। परिवार का एक प्रमुख होगा जो परिवार में सबसे अधिक उम्र का व्यक्ति होगा । उसकी भूमिका राष्ट्र पति के समान होगी। प्रमुख के प्रस्ताव पर सभी सदस्य गुप्त मतदान द्वारा मुखिया का चुनाव करेंगे। अन्य नियम परिवार बनायेगा। मुखिया प्रमुख के नाम पर परिवार का संचालक होगा। परिवार जिन कार्यो को नही कर सकेगा अथवा जो कार्य किन्ही अन्य इकाइयों से संबंध रखेगे वे सब कार्य परिवार ग्राम सभा को दे देगा।
प्रत्येक परिवार पंजीकृत होगा। उसे एक कोड नम्बर दिया जायेगा, जो नौ अंकां का होगा। यह नम्बर परिवार की स्थाई पहचान होगी। इसी नम्बर पर उसके वैक एकाउंट न्यायालय के केश , पोस्ट आफिस का पता गाडी नम्बर फोन न0,आदि सारा लेखा जोखा रहेगा। मतदान सूची का नम्बर भी वही रहेगा। परिवार का प्रमुख एक होगा किन्तु यदि परिवार के कुछ सदस्य दूसरे गांव में रहते है तो प्रत्येक गांव में एक उप प्रमुख रहेगा । वह उप परिवार उस गांव में पंजीकृत होगा किन्तु सम्पत्ति सबकी संयुक्त रहेगी। कोड नम्बर इस प्रकार होगा कि पहले दो नम्बर लोक प्रदेश दूसरे दो लोक जिला, तीसरे दो ग्राम तथा अंतिम तीन अंक परिवार की पहचान करेंगे।

न्यायिक सक्रियता कितनी समस्या? क्या समाधान?

Posted By: admin on May 21, 2016 in Recent Topics - Comments: No Comments »

Untitled-1आजकल न्यायपालिका और विधायिका के आपसी संबंधो में प्रत्यक्ष टकराव की भूमिका बन गई है। टकराव सडको पर आना बाकी था जो उत्तराखण्ड मामले में उच्च न्यायालय द्वारा राष्ट्रपति के विरुद्ध की गई टिप्पणी तथा अरुण जेटली द्वारा राज्यसभा में न्यायपालिका की सीमाओं का ध्यान दिलाने से शुरु हो गया है। टकराव सडको पर आयेगा यह निश्चित
दिखता है, भले ही उसमें एक दो वर्ष की देर भले ही हो जाये।
स्वतंत्रता के पूर्व ही लोक और तंत्र के बीच आपसी संबंधो और सीमाओं को लेकर दो धारणाएॅ थीं 1 गॉधी जी की विचारधारा जो लोक को मालिक और तंत्र को प्रबंधक के रुप में मानकर चलती थी। 2 विचारधारा उन राजनेताओं की थी जो तंत्र को संरक्षक और लोक को संरक्षित मानकर चलती थी। स्वतंत्रता के पूर्व सुभाषचन्द्र बोस तानाशाही के पक्षधर थे, तो सरदार पटेल सीमित मताधिकार के पक्षधर। नेहरु अम्बेडकर बालिग मताधिकार के पक्ष में होते हुए भी केन्द्रित शासन प्रणाली के पक्षधर थे। यह सब होते हुए भी गॉधी जी को जिस तरह लोक का अन्ध समर्थन प्राप्त था, उसके समक्ष ये सब बौने सिद्ध हो रहे थे। गॉधी जी ने पटेल और सुभाष जी की तुलना में नेहरु अम्बेडकर का पक्ष लिया, किन्तु गॉधी के मरते ही ये सब परम स्वतंत्र हो गये।
भारत में संविधान का शासन है शासन का संविधान नहीं। संविधान का शासन लोकतंत्र होता है और शासन का संविधान तानाशाही। स्वतंत्रता के बाद गॉधी की मृत्यु होते ही हमारे संविधान निर्माताओं ने लोकतंत्र की लोकनियंत्रित तंत्र वाली परिभाषा को बदलकर लोक नियुक्त तंत्र कर दिया, जिसका अर्थ हुआ कि तंत्र को लोक संवैधानिक तरीके से नियुक्त तो कर सकता है किन्तु संविधान पर अंतिम नियंत्रण तंत्र का ही होगा, लोक का नहीं। इसका अर्थ हुआ कि संविधान संषोधन मे लोक की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष किसी प्रका की भूमिका नही होगी । संविधान संशोधन के सारे अधिकार तंत्र से जुडे तीन अंगों, न्यायपालिका विधायिका और कार्यपालिका ने आपस में बांट लिए। इसका अर्थ हुआ कि संविधान इन तीनों अंगो का गुलाम हो गया और जिसका अप्रत्यक्ष प्रभाव हुआ कि तंत्र शासक बन गया क्योकि संविधान पर इन तीनों इकाईयों की संयुक्त प्रक्रिया का एकाधिकार हो गया। यही कारण था कि तंत्र ने स्वयं को सरकार घोषित कर दिया, जबकि उसे स्वयं को प्रबंधक घोषित करना चाहिए था।
सीधा सा सिद्धांत है कि लुटेरे लूट की कार्यवाही को अंजाम देते समय एक जुट रहते है, किन्तु किसी तरह का खतरा समाप्त होने के बाद लूट का माल बटवारा करते समय आपस में विवाद पैदा होते है। तंत्र के तीनों अंगो में भी तत्काल विवाद पैदा हुए जिसकी शुरुवात 1950 में विधायिका ने की। विधायिका ने संविधान संशोधन के सारे अधिकार संविधान लागू होने के एक वर्ष के भीतर ही अपने पास समेट लिए और न्यायपालिका को उससे बाहर कर दिया। कुछ ही वर्षो बाद विधायिका ने राष्ट्रपति के अधिकारों में भी कटौती कर दी। और इस तरह संविधान एक मात्र विधायिका के नियंत्रण में आ गया। न्यायिक समीक्षा से मुक्त होने के बाद विधायिका ने संविधान में बेशर्म तरीके से मनमाने संशोधन किये। संविधान में आरक्षण की सीमा दस वर्ष थी तो मनमाने तरीके से उसे आज तक बढाया जाता रहा। दूसरी ओर संविधान में समान नागरिक संहिता एक नीति निदेशक तत्व था किन्तु कभी समान नागरिक संहिता लागू करने के विषय में कोई प्रयत्न नहीं किया गया। समाज को धर्म जाति भाषा क्षेत्रियता उम्र लिंग के आधार पर तोडकर उनमें वर्ग संघर्ष पैदा करने के भरपूर प्रयास किये गये, किन्तु कभी परिवार या गॉव को संवैधानिक अधिकार और मान्यता देने की चिंता नही की गई।एक बार भूल से राजीव गॉधी ने वैसा प्रयत्न किया भी तो उस प्रयत्न को अप्रत्यक्ष तरीके से प्रभाव हीन बना दिया गया।
आमतौर पर यह माना जाता है कि सत्ता जब तानाशाह होती है तो उसकी प्रत्यक्ष लोकप्रियता भय के कारण बढती है तथा अप्रत्यक्ष लोकप्रियता घटती है। भारत में भी यही हुआ और विधायिका का चरित्र गिरता गया, प्रतिष्ठा गिरती गई और लोकतंत्र के कारण अव्यवस्था बढती गई। ऐसे ही समय में अवसर पाकर न्यायपालिका ने जनहित याचिका तथा मूल ढांचा के नाम पर विधायिका की तानाशाही में अप्रत्यक्ष घुसपैठ की। मैं कह सकता हॅू कि न्यायपालिका ने इन दो असंवैधानिक निर्णयों के द्वारा भारत के लोकतंत्र को बचा लिया अन्यथा भारत में लोकतंत्र का क्या हाल होता यह कल्पना ही की जा सकती है। किन्तु दुनिया में पावर का नशा अन्य सब प्रकार के नसों से ज्यादा प्रभावशाली होता है। और इसलिए न्यायपालिका भी धीरे धीरे पावरफुल होती गई और उस पर सत्ता का नषा सवार होने लगा। न्यायपालिका के तीन काम होते है। 1 व्यक्ति के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा चाहे वह संविधान द्वारा ही खतरे में क्यों न आ जाये। 2 संविधान के विरुद्ध बनने वाले कानूनों से संविधान की सुरक्षा। 3 कानून के अनुसार न्याय की पहचान। स्पष्ट है कि विधायिका कानून के अनुसार न्याय को परिभाषित करती है, न्यायपालिका न्याय अन्याय को अलग अलग करती है, तथा कार्यपालिका न्याय को कार्यान्वित करती है। न्यायपालिका को न तो न्याय को परिभाषित करने का अधिकार है न ही कार्यान्वित करने का। ज्यां ज्यों विधायिका न्यायपालिका के समझ झुकती गई त्यां त्यों न्यायपालिका विधायिका के कार्य भी अपने हाथ में लेती गई तथा कार्यपालिका के भी। हद तो तब हो गई जब न्यायपालिका ने कॉलेजियम सिस्टम घोशित करके संविधान संषोधन तक के अधिकार अपने पास समेटने शुरु कर दिये। न्यायपालिका किसी संविधान संषोधन को मूल ढांचे के विरुद्ध घोषित करके शून्य तो घोषित कर सकती है किन्तु उसकी जगह कोई व्यवस्था नहीं दे सकती । किन्तु न्यायपालिका ने किया। न्यायपालिका का मनोबल बढता गया और न्यायपालिका ने उत्तराखण्ड मामले में राष्ट्रपति पर भी अनाधिकार टिप्पणी करने की गलती कर दी। उसका मनोबल और बढा और उसने केन्द्र सरकार को यह आदेश भी दे दिया कि वह सूखे के लिए बजट में प्रावधान करके न्यायपालिका को सूचित करे। विधायिका लम्बे समय से न्यायिक सक्रियता से परेशान थी और सूखे संबंधी आदेश ने विधायिका को मूॅह खोलने का अवसर दे दिया। मैं मानता हॅू कि उत्तराखण्ड संकट विधायिका की ही देन है, न्यायपालिका की नहीं। उत्तराखण्ड विधानसभा में विधानसभा अध्यक्ष ने नैतिकता के विरुद्ध कानून का सहारा लिया तो केन्द्र सरकार ने भी नैतिकता को छोडकर कानून का सहारा लिया और विधानसभा भंग कर दी । न्यायपालिका ने भी अपनी सुविधा अनुसार कहीं नैतिकता का सहारा लिया तो कहीं कानून का। न्यायपालिका का निर्णय भी स्पष्ट रुप से नहीं कहा जा सकता कि उसने कानून के अनुसार न्याय किया अथवा नैतिकता के आधार पर। फिर भी उत्तराखण्ड मामले से जले भुने राजनेताओं ने सूखे संबंधी न्यायिक आदेश को आगे रखकर टकराव का मार्ग चुना।
न्यायपालिका और विधायिका के गुण दोष अलग अलग होते है। न्यायपालिका का आदेष किसी उपर की इकाई में नहीं ले जाया जा सकता। न तो विधायिका उसकी समीक्षा कर सकती है न ही जनता। चूंकि जनता न्यायपालिका को प्रत्यक्ष नियुक्त नहीं करती इसलिए जनता का कोई नियंत्रण भी नहीं है। यदि न्यायपालिका प्रषासनिक आदेश देने लगेगी और वह आदेश गलत होगा तो उसके संषोधन का न लोक के पास कोई मार्ग है न ही तंत्र के पास। संविधान भी ऐसे आदेष मे हस्तक्षेप नही कर सकता। दूसरी ओर यदि विधायिका पर विचार किया जाये तो विधायिका को भी यदि यह अधिकार दे दिया जाये तो इसके दोष स्पष्ट है। विधायिका में बैठा व्यक्ति तानाशाह भी हो सकता है जबकि न्यायपालिका में बैठा व्यक्ति तानाशाह नहीं हो सकता क्योंकि सर्वोच्च पदाधिकारी न्यायपालिका में अल्पकाल के लिए ही हो सकते है जबकि विधायिका में तो अपने मरने के बाद भी अपनी पीढियों के लिए स्थान सुरक्षित कर जाते है। मेरे विचार से न्यायिक सक्रियता में न्यायपालिका से न्यायिक तानाषाही का खतरा है व्यक्ति की उच्श्रृखलता का नहीं। जबकि विधायिका में विधायी तानाशाही का खतरा नहीं हॅ व्यक्ति की तानाषाही का है। इसलिए दोनों इकाइयां मे संतुलन के अतिरिक्त कोई मार्ग नहीं है। इसका अर्थ हुआ कि न्यायपालिका विषेष परिस्थितियों में ही कार्यपालिक आदेश दे अन्यथा अपनी सीमा का उलंघन न करे तथा स्वयं को न्यायिक आदेश तक सीमित रखे। इसी तरह विधायिका को भी कार्यपालिका तथा न्यायपालिका की सीमाओं का अतिक्रमण नहीं करना चाहिए।
किन्तु यह कोई समाधान न होकर एक तात्कालिक व्यवस्था मात्र है। लूट का माल यदि वास्तविक मालिक को वापस नहीं हुआ तो टकराव समाप्त नहीं होगा। जब तक संविधान पर तंत्र की इकाइयों का नियंत्रण होगा तब तक यह विवाद नहीं सुलझेगा। इसका आदर्ष समाधान तो यही है कि संविधान संशोधन के असीम अधिकार संसद के पास न रहकर उसमें लोक के भी हस्तक्षेप का कोई न कोई प्रावधान होना चाहिए चाहे वह जनमत संग्रह हो अथवा संविधान सभा द्वारा अथवा लोक संसद जन संसद या कोई और। संविधान पर तंत्र का एकाधिकार सारी बुराईयों की जड है, और उसका समाधान इस एकाधिकार में लोक का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप ही हो सकता है, जो तंत्र के तीनों अंगों में से किसी को स्वीकार नहीं, क्योंकि उनका उददेष्य लूट के माल को मालिक के पास पहुॅचाना नही है।
फिर भी यदि हम वर्तमान स्थिति का विचार करे तो न्यायिक सक्रियता के पूर्व की विधायिका से लोक को खतरा ज्यादा था। अब न्यायपालिका की छोटी छोटी गलतियॉ पुनः विधायिका को मजबूत कर सकती है और यह विधायिका का सशक्तिकरण यदि अधिक बढा तो फिर पुरानी खतरनाक स्थिति की ओर जा सकता है, जिसे न्यायपालिका भी रोक नहीं पायेगी। अच्छा हो कि न्यायपालिका विधायिका को ऐसे अवसर न दे कि विधायिका उसका लाभ उठाकर अपने को मजबूत करने की दिशi में तेजी से आगे बढ सके।
हम लोक के लोग तो किं कर्तव्य विमूढ हैं, कि हम किसका साथ दें। न्यायपालिका और विधायिका संविधान को अपनी अपनी मुट्ठी में रखने की लडाई लड रहे है। जब विधायिका मजबूत थी तो जनमत ने न्यायपालिका का साथ दिया और अब न्यायपालिका सीमा उलंघन कर रही है तो जनमत विधायिका की तरफ झुक रहा है। लेकिन यह तो हमारे लिए कोई आदर्श स्थिति नहीं है। आदर्श स्थिति तो तब होगी जब दोनो में से कोई एक संविधान को अपनी मुटठी से बाहर करने की कोई योजना प्रस्तुत करे। जब तक ऐसा नहीं होता तब तक तो हम प्रतीक्षा ही कर सकते है या दोनां के टकराव में कमजोर पक्ष का साथ देकर उसे टकराने के लिए प्रोत्साहित ही कर सकते है। हम उस दिन की प्रतिक्षा कर रहे है जब हमारा संविधान तंत्र की मुठ्ठी से मुक्त होकर खुली हवा मे सांस ले सकेगा तथा लोक के साथ मिलकर तंत्र को नियंत्रित कर सकेगा।

केन्द्र सरकार का महत्वपूर्ण नीति परिवर्तन

Posted By: admin on May 18, 2016 in Recent Topics - Comments: No Comments »

National-Institution-for-Transforming-Indiaभारत सरकार ने अपनी नीतियों में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए घोषित किया है कि भविष्य में खेती के लिए कृत्रिम खाद को निरुत्साहित तथा जैविक खाद को प्रोत्साहित किया जायेगा। इस बदलाव की गति इतनी अधिक तेज है कि छ0ग0 सरकार ने इसी वर्ष पॉच जिले चयनित करके वहॉ कृत्रिम खाद अर्थात यूरिया आदि को समाप्त करने की योजना बनाई है।
भारत के पारम्परिक किसान लम्बे समय से जैविक खाद को महत्वपूर्ण मानते आ रहे थे। यहॉ तक कि लगभग 60 वर्षो तक पूरी सरकार पूरी ताकत से कृत्रिम खाद को प्रोत्साहित करती रही। किन्तु भारत का पारम्परिक किसान कभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हुआ। मुझे याद है कि 1965 में भारत सरकार ने रामानुजगंज में लगभग निशुल्क यूरिया देना शुरु किया था और फिर भी सामान्य किसान उपयोग करने कि लिए तैयार नहीं थे। मैं एक प्रगतिशील किसान माना जाता था और मेरे उपर सरकारी प्रचार की विश्वसनीयता का रंगीन चश्मा लगा हुआ था। इसी का परिणाम था कि मैंने उस समय किसानों को यूरिया उपयोग बढाने के लिए प्रोत्साहित किया। आज मैं सोचता हॅू कि प्रगतिशीलता के माप दण्ड पर सवार मैंने अंधी सरकारों का अंध समर्थन करके एक गलत कार्य किया था, जिसका मैं दोषी हॅॅू। प्रश्न यह खडा होता है कि सरकारों को यह निष्कर्ष बदलने में सात दशक क्यों लग गये। इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण और विचारणीय विषय यह है कि क्या यह सरकार का काम है कि वह खेती में खाद के उपयोग के लिए योजना बनाकर किसी विचारधारा को प्रोत्साहित या निरुत्साहित करे? क्या लम्बे समय से चली आ रही परम्पराओं को आंख मूंद कर बिना सोचे समझे बदलने की परम्परा ही प्रगतिशील होने की निशानी है? आज सरकार फिर से जैविक खादों को प्रोत्साहित करने में अपनी शक्ति लगाकर वैसी ही भूल कर रही हैं। क्या यह अंतिम रुप से सिद्ध हो गया है कि अब कृत्रिम खाद की दिशा में कोई सरकार नहीं जायेगी। सच बात यह है कि खाद कृत्रिम हो या जैविक यह निर्णय करना किसान का काम है सरकार का नहीं। यदि सरकार को कोई विशेष निर्णय दिखता है तो वह किसानों को वैसा निर्णय बता सकती है किन्तु उसके पीछे प्रोत्साहन या निरुत्साहन के लिए शक्ति नहीं लगा सकती। खाद का मामला अकेला ऐसा नहीं है जिसके पीछे सरकारें अनावश्यक शक्ति लगा रही हैं। महिला सशक्तिकरण जैसे अनेक ऐसे प्रयास हैं जिन्हे सरकारें भविष्य में गलत मानकर अपनी नीतियों में बदलाव कर रही है। अभी अभी हमने देखा है कि मकान किराया कानून अथवा दहेज कानून के संबंध में भी सरकारों ने यूटर्न लिया है। मेरी सलाह है कि सरकारों को इस प्रकार के मामलों में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए। सरकार का काम न महिला सशक्तिकरण है, न किराया कानून बनाना और न ही दहेज कानून बनाना। ये सब काम समाज के है और समाज के कामों में सरकारों को विशेष परिस्थिति में ही हस्तक्षेप करना चाहिए सामान्यतया नहीं। जबकि सरकारें सामान्यतया हस्तक्षेप करती है तथा भविष्य में ऐसे हस्तक्षेप को गलत कहकर यूटर्न लेती है। सरकारों का तो कुछ नहीं बिगड़ता किन्तु समाज को बहुत नुकसान हो जाता है।

Improve Internet Advertising and marketing with Greatest Strategies

Posted By: admin on May 14, 2016 in Uncategorized - Comments: Comments Off

Web Advertising is a company’s greatest software for increasing sales on this digital age that we live in. Virtually every side of a person’s life is in some unspecified time in the future connected to the Internet. This is very evident within the quantity of social media interplay that is carried out every day.

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People will respect you and hearken to you if in case you have an important title. If in case you have your individual enterprise, make your self CEO. If you do not own your small business, find a inventive title that evokes authority and power. Signal your articles and emails together with your identify and your title.

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Your business ought to have a Facebook and Twitter page, to be able to enhance your marketing presence on-line, however you shouldn’t include your private pages. You can nonetheless be a real live particular person, but you desire a Facebook web page for your small business and a Twitter account as the owner of the business. You’ll be able to have the identical identification, you just don’t want your clients in your pal’s checklist, except you truly are friends.

As indicated firstly of the article, the world of internet marking has taken off and keeps on growing. It has branched out everywhere in the world and there may be not different technique or reaching potential prospects everywhere in the world. By adopting the practices of web advertising and Network Marketing on this article, you’ll be able to attain out to prospects all around the web.

More and more individuals are spending their lives online. That’s already a given fact. Subsequently, it will be more prudent if companies were to focus their advertising initiatives online as nicely, since more and more of their clients are accessible there. Nevertheless, there are still skeptics who insists that the traditional advertising methods are nonetheless the best.

Though this may be true. One cannot deny the larger advantages that Internet advertising affords to companies as we usher in this digital age. Beneath are 5 nice advantages of Web Advertising and marketing:

5 High Advantages of Internet Advertising

Transcend boundaries – This this some of the obvious benefits Web advertising provides over the custom method. With Web advertising, your enterprise could be able to succeed in markets that you just’re not able to reach before. Just like how you’re able to speak to an individual dwelling in Russia with just a click on of a button, the identical thing applies to advertising your business. Web Marketing isn’t sure by geographical limitations since all the pieces is finished online. You’ll be able to showcase your merchandise to clients 1000′s of miles away with Web marketing. If you need your corporation to grow, marketing it online is the best choice you may ever make.

Cheaper prices – The cost for advertising and marketing your business on-line is considerably cheaper compared to conventional means. Since every part is digital, launching a advertising campaign, designing a product pamphlets, disseminating it by way of various social media platforms is just a matter of pointing and clicking. In addition to that, the manpower needed and the price involved to take care of that manpower is significantly lower. Through Internet advertising, corporations can promote their wares directly to their customers. This eliminates the necessity for retail outlets to pay retail costs just to showcase and promote their product.

Ease of Data Gathering – To be able to successfully market your products to folks, you should first identify which area of interest your online business caters to. You have to determine the type of customers that has a higher demand for your product. To do that, you need to gather pertinent customer data and what better place to do that than the Internet. Online data gathering has by no means been so easy. With the advent of on-line knowledge varieties, data gathering not only takes a shorter period of time, but also makes it easier to find people who are prepared to answer your information gathering questionnaires.

A customized sales experience – We’ve all been prospects before. As prospects we all the time wish to really feel that we’re the sole focus of the corporate as we transition to creating that buying decision. We would like them to treat us like we’re an important buyer within the world. In the physical world, we will probably address 2-3 clients at a time; not sufficient to make a major impression in the total sales expertise of the customer. With Internet advertising, nonetheless, we can personalize a customer’s sales expertise easily. Since each transaction is completed via an online browser, we’re able to create sure programs or plug-ins that will advocate the perfect merchandise to your customers. In addition to that, we can additionally show our prospects similar merchandise that is perhaps of interest to them. Overall, this creates a sense of significance to the shopper; that the corporate went out of their option to give them a improbable sales experience.

Higher buyer interplay – Advertising your products and interacting with all your clients has by no means been this straightforward with Internet marketing. Because you are able to reach your customers far and broad, you will be able to interact with them even after the gross sales course of ends. The fantastic thing about this complete factor is that you don’t even have to depart the comfort of your property or office. You’ll be able to reach your prospects 24/7. You possibly can ask them how they’re having fun with their product, what other potential products they could need or maybe provide them some after sales assist if their encountering any issues in using your product. This all comes down to making your prospects feel that they’ve handled a real human being as an alternative of some huge corporate machine that’s only fascinated about their money.

Russian T Shirts

Posted By: admin on May 13, 2016 in Uncategorized - Comments: Comments Off

ernesto che guevara factsCast member Benicio Del Toro attends a news conference for the film ‘Che’ by director Steven Soderbergh at the 61st Cannes Film Festival May 22, 2008.

The embargo doesn’t make any sense. I uncover it silly, obsolete, and archaic. But it is actual. It is some thing the Cubans have to deal with everyday. The embargo creates an atmosphere of still becoming at war, from the Cuban point of view. I feel for the Cuban folks. They get caught in the crossfire. It is amazing how Cuba has been in a position to stick it out.

At the same time, thousands of Latin American political activists flooded into Guatemala to observe Arbenz’s reforms firsthand. Che Guevara was among them. In a letter to his aunt in Argentina, Guevara explained his causes for the trip: I had the opportunity to pass via the landholdings of United Fruit, convincing me once once more of just how terrible these capitalist octopuses are. I have sworn… that I won’t rest till I see these capitalist octopuses annihilated. In Guatemala I will best myself and attain what I need to be an genuine revolutionary.

If you want to buy an apparel in line with entertainment, you have a lot of selections to choose from. First, there are celebrity T-shirts which are made with the faces of well-known celebrities. Among these celebrities are Bruce Lee, Che Guevara, Kurt Cobain, Marilyn Monroe, and Audrey Hepburn. Some of the shirts come with anime designs. The most well-liked are Naruto T-shirts, Bleach T-shirts, and Fruits Baskets T-shirts. Of course, there are also film T-shirts which are amongst the most sought-following things. Some of these are Carrie shirts, Batman shirts, The Punisher shirts, and Borat shirts. Other entertainment T-shirts are sports, music, comics, video games, and tv.

In a nutshell, Pedagogy of the Oppressed” instructs that teachers need to inform students that they are oppressed and abused beneath capitalism. Teachers must also tell students who is responsible <a href="https://youtube.com/watch? If you beloved this report and you would like to get a lot more information pertaining to Ernesto Che Guevara kindly visit the web site. v=iYmuRWtWzNg”>che guevara t shirts for this oppression. As soon as students learn how oppressed they are, the theory goes, they will rise up and join a revolution that will implement a classless society.

Numerous racialists are unsure about, and even against, these Occupy Wall Street protests all around the nation. It has been pointed out to me that numerous protesters are non-white and/or communists.” Properly my answer to that is: WHO CARES?!” They are against the same evil, corrupted, degenerate capitalist elitists that WE are against! Instead of screaming, six million more!” The pro-white movementites ought to be JOINING this Occupy movement and supporting it!

Call Now TV and Get Some Relevant Product Information

Posted By: admin on May 11, 2016 in Uncategorized - Comments: Comments Off

It is important for people, particularly first-timers, to learn more details regarding a product or service just before shelling out some cash so as to acquire it. Obviously, most people will have to read reviews about the certain product. Reviews are helpful given that they give honest feedbacks from individuals who have tried out a product or service first hand. Certainly, information from reviews are helpful, however you may also think about getting in touch with Now TV if you want a detailed explanation on a certain product or service.

now tv helpMost of the time, companies today have an official website. Here, they post ads for the public to be aware of their services and products. Consumers will also know if there are ongoing promos and discount offers through company websites. Along with the email address along with other contact details, it is also through the company’s website that clients will know exactly what the mouse click the up coming document is. If you would choose to check out them personally, the physical address of their offices is also presented. Certainly, calling the company directly is crucial to discover reliable details concerning something that some other sources may not be able to provide.

If you only want to have a more in-depth understanding about the features and benefits of a specific product or service, then you don’t have to visit their office personally. It’s simpler if you get in touch with Now TV for a representative will answer all your queries. Definitely, the company’s representatives are competent enough to tell you the best features of their products and/or services. Contacting them might even present you the opportunity to get discounts from a sales representative. Your conversation with a representative is also your very best chance to ask some questions if ever you are confused with something like the Terms and Conditions of a particular service or product. The representative can also give you some recommendations base on your choice and needs.

If you have any concerns, then you can call the company for assistance. It is not recommended to seek help from other individuals since you may simply add harm to your existing problem. Contacting Now TV is really a sensible move most specifically if the new equipment you have acquired is defective. You can ensure that your demands will be addressed only if you speak with a representative from the company. It is the duty of customer service agents to look for means in fixing any problem raised by their valued clients. Rather than asking ordinary individuals, it is greater to seek help from professionals who are taught to handle concerns related to a particular product or service.

Needless to say, practical consumers will need to know more about the product before buying it. Doing this offers you the confidence that your money is spent on stuff that are useful and efficient. Contacting the company is surely a sensible move as they are the experts of their product and service. Well, the company’s representatives are quite adept to deal with various kinds of situations to assist their customers. The things mentioned previously are enough evidence as to exactly why you mustn’t hesitate getting in touch with Now TV right now.

Free Xbox 360, Free Tomtom – What’s the Issue?

Posted By: admin on May 9, 2016 in Uncategorized - Comments: Comments Off

abonnement xbox live gold gratuitMicrosoft is positioning this as a proven way to contest with Apple TV, since you can get quite of entertainment services on his or her Xbox. Honestly I used Netflix and Hulu for pretty much a year without an issue, simply because can see what Microsoft is looking to do.

Watching movies is has never been this enjoyable! Earning money spend time with family members members. A busy week can be so wearing that expending weekend property watching your favorite movie on the web is the most important step.

This is not the first time you can easily demo discs at retail stores. You can often find Jampacks, demo discs for Playstation 2 games, sold alongside full retail something. Furthermore, demos are often used hefty internet in subscribers (Qore, official magazines and xbox Live Gold).

xbox live gold The cast of characters is great as always. The story is intricate and complicated at times but is slowly unraveled to people. The upgrade system is back for items and goes great with this activity.

I think the main success of Zeno Clash was that any of us demonstrated your committed & creative group can set out to create something new and risky and still succeed in an industry offers aversion to unfamiliar creative ideas. This is an idea that we’re again creating to Rock of Ages and significantly the community’s reception along with the media’s reception have been very positive to what we’ve shown so a good way.

The give an account to the second question is yes, is actually because absolutely permissible. You see, there are web sites that cash from surveys sponsors when their users participate in surveys, contests, and other free does offer. These generally consist of providing a tad of demographic information with regards to you — your e-mail address or your ZIP code, or perhaps your name, postal address, and xbox live telephone number.

The technology that the Xbox uses is definitely advanced furthermore is one of the main trumps that experienced so many people going crazy over this kind of. And if there is you may even no other console online has capable to implement, that option is the live spot the. This means that if is actually an someone else, one of your friends maybe, you for you to play a match together with, you will have the ability to implement this easily. Doesn’t this sound great or what?

If you beloved this write-up and you would like to receive extra info relating to ultragenerators.com kindly visit our own web page.

Developer: Ps3 A ‘Pain In The Ass,’ Xbox ‘A Dumb Pc’

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Which you will need to you use? If you don’t mind paying a bit extra for Blu Ray DVD rentals (if essential to rent on Blu Ray), Netflix is best because in the movie wide array.

Microsoft is spreading the love, with new weekly deals for xbox Live Gold People today. Each week, Microsoft plans on having at any rate one special for their Xbox Live Gold members (i.e. paying Xbox Live members). Focuses on the theory is smoothly piece of content, be it xbox Live Marketplace games, Xbox Originals, or other DLC (downloadable content).

The Xbox works exactly the same as the Wii will, but Ps3 streaming become available to Xbox Live Gold members, who pay $50 twelve months to play games within the. The one difference for Wii seems to that rue . support high-definition, which both the PS3 and Xbox could.

I explained that after i tried the online method I used told might cost us a 100 bucks and xbox live gold going without shoes was my understanding that you’ve a three year warranty. After giving my serial number for the umpteenth time along with date of manufacture of my unit I was told the repair would indeed attend no charge and that she would cure setting inside the repair. Utilised to be told turn-around time is two to three weeks.

Nintendo knows what they’re doing, and they also know a pricy controller are a horrible thing for your consumer, casual or customized. If these everything’s indeed implemented into the controller, it will eventually be within a much more subtle way than impacts have already imagined.

Keep your minerals and gas low at year ’round. This may look like a wierd tip, nonetheless it is very helpful: keep your minerals and gas low (less than 400) nearly all of the enough time. This means must constantly be pumping xbox live items. If you already are, then make more structures which tend to make more pantry shelves. You get the point: just keep on making units.

The premise is simple, and very addictive. You’re main goal is to pick up all the gold from a level. After climbing ladders and avoiding enemies that like to hate on you’re mad treasure snatching skills, find the exit(usually on the form of any door) and find ready to repeat the process on fresh new level.

An Xbox Live membership allows a person take benefit of all the contents by the Xbox website in accessory for your gaming system. Every Xbox system comes with a free xbox live gold Silver program. While Silver membership gives the fundamentals generates your game play more pleasurable, Gold a person in on the total Xbox experience. To be used membership is exactly less than Rs. 5000. Xbox Live Gold subscription additionally be available on the quarterly basis but may vary according to is the most cost-effective. Activating your Xbox Live membership lets you access a lot of people of essentially the most extreme gaming experience being had today, plus numerous extras and access for the global gaming community!

If you have any kind of issues concerning where by and how you can work with Xbox Live Gratuit, it is possible to e-mail us in our own web-site.

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First a NetLinkable game would be booted up in the Saturn, and then connected to the internet. There players would join chatrooms with other gamers who were online at the same time and looking for a match.

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Try and make xbox live gold these meetings light. Do not try and obtain a date off the bat. Just start random chit-chat with girls. Whenever they seem cool, then (and only then) ask on her number.

Ever watch the show and think you can win the prize? Well, if you need to an Xbox 360, can get the time real swiftly. With 1 vs 100 for you to become released soon on Xbox Live, its going to give the opportunity place yourself on The Mafia. On the show, The Mob is given a in order to answer dilemma before make certain contestant options. The amount of greenbacks banked, is dependent the quantity Mob members eliminated on each debate. If the one contestant eliminates all 100 mob members, they are awarded a highly regarded prize. Involved with announced that Xbox Live will actually be awarding prizes, so perhaps you can end up the big winner or be the next person on youtube who offers the easiest question wrong. The look at the trailer below.

Today, the focus is during the 2002 innovation introduced by Microsoft for your original big black box: The xbox. However, charges just a little has seen an upgrade in next years along the xbox three-hundred-and-sixty.

Dancing is definitely an great work from. Dancing–when done more than once a week–helps you are working your muscles and fortify your method. Even a low impact dancing like ballroom dancing is useful for you, though if you will want to obtain rid of fat, jazz or ballet is better. Be serious: don’t you appreciate dancing–even if you refuse to do it in the front of others and only try out when you’re home alone? This is common why it’s a great workout if you want to lose pounds and add to your health.

Finally, genuine effort Hazard. Battles on this map manifest on a a portion of a the game. There are gazebos, club houses, walls as well course an exceedingly open and dangerous course. Snipers can hide near the club house or by a gazebo on the other guitar side from the map over the course. Some thing hills and walls to disguise behind, this map is really a sniper’s somewhere warm. A great map for domination actually just deathmatches.

You can be wondering for your “red-ring of death” that i reported on recently. I wouldn’t allow this to stop me from purchasing. Why? Because if this nasty ailment raises its ugly head, Microsoft will fix it free, including free shipping to and from Microsoft for heal. Supposedly Microsoft has gotten a handle on xbox live the thing is and it should be happening with less frecquecy as well.

Microsoft additionally be holding a sweepstakes from April 29 through May 30 and people have to enter is download and use Hulu Or more. Loading up Hulu Plus counts as an entry and users can enter a great deal as 20 times a day or two. One first-prize and three second-prize winner will picked in the end each and every week. First prize winners can receive a vacation at a Beaches resort while second prize winners will get yourself a Xbox 360 4GB Kinect Bundle and a year’s subscription to Xbox LIVE.

If you have any kind of inquiries pertaining to where and ways to make use of xbox live gratuit, you could contact us at our web site.

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