परिवार व्यवस्था

Posted By: admin on May 26, 2016 in Recent Topics - Comments: No Comments »

Family-1अब तक परिवार को प्राकृतिक इकाई माना जाता रहा है जो मेरे विचार में गलत है । परिवार एक संगठन हैं, प्राकृतिक इकाई नही। व्यक्ति से लेकर समाज तक व्यवस्था के दो क्रम प्रचलित रहे हैं। 1 व्यक्ति परिवार, गांव जिला प्रदेश , देश , विश्व, 2 व्यक्ति, परिवार , कुटुम्ब , जाति, वर्ण धर्म, राष्ट्र, समाज। पहली व्यवस्था मुख्य रूप से संवैधानिक या राजनैतिक है और दूसरी सामाजिक किन्तु भारत के संविधान निर्माताओं ने ना समझी में दूसरी व्यवस्था को संवैधानिक मान लिया तथा पहली को सामाजिक । व्यक्ति के मूल अधिकारों की सुरक्षा राज्य का दायित्व है और राज्य इन इकाइयों के माध्यम से सुरक्षा और न्याय का कार्य करता है जबकि व्यक्ति को ठीक दिशा में चलने की ट्रेनिग देना समाज का काम है तथा समाज दूसरे क्रम के माध्यम से इस काम को करता रहा है । चूकि सत्तर वर्षो मे पूरी व्यवस्था अस्त व्यस्त हो चुकी है तथा अनेक शब्द भी अपना भावार्थ बदल चुके है इसलिये अब दूसरे क्रम को पूरी तरह छोड कर पहले क्रम में ही राज्य और समाज को एकाकार हो जाना चाहिये । वैसे भी दोनां ही क्रमो में परिवार व्यवस्था शामिल रही है, किन्तु पता नही हमारे संविधान बनाने वालो ने क्या सोचकर परिवार को बाहर किया । संभव है कि पश्चिम की व्यवस्था में परिवार को महत्व न होने से इन्होने भी आंख बंद करके नकल कर दी।
परिवार की एक परिभाषा होगी ‘‘संयुक्त सम्पत्ति तथा संयुक्त उत्तर दायित्व के आधार पर एक साथ रहने के लिये सहमत व्यक्तियों का पंजीकृत समूह‘‘। किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत सम्पत्ति नहीं होगी। परिवार से पृथक होते समय व्यक्ति परिवार की सदस्य संख्या के आधार पर हिस्सा लेकर अलग होगा तथा नये परिवार में सम्मिलित करेगा। यदि कोई व्यक्ति किसी परिवार का सदस्य नही होगा तो वह ग्राम परिवार में अपनी सम्पत्ति अमानत रखेगा, जिसे वह तब तक खर्च नहीं कर सकता जब तक वह किसी परिवार का सदस्य न हो जावे । यदि किसी परिवार का कोई सदस्य कोई अपराध करता है, तथा यह प्रमाणित हो जाता है कि परिवार ने जानते हुए भी न रोका न उसे अलग किया तो परिवार को भी इसमे दोषी माना जा सकता है। परिवार अपने अधिकार तथा कार्य प्रणाली स्वयं तय करेगा किन्तु यह ध्यान रखेगा कि अपने परिवार के किसी सदस्य की सहमति के बिना उसके मौलिक अधिकारों की सीमा न टूटे तथा किसी अन्य परिवार अथवा राज्य की सीमाओं का भी अति क्रमण न हो। परिवार का कोई भी सदस्य कभी भी परिवार छोड सकता है या निकाला जा सकता है। यदि परिवार का कोई सदस्य राज्य अथवा समाज की किसी इकाई के पास परिवार के विरूद्ध कोई शिकायत करता है तो उसे तत्काल परिवार की सदस्यता छोडनी होगी किन्तु कोई किसी सामाजिक इकाई से सलाह या निवेदन कर सकता है । परिवार का प्रत्येक सदस्य पंजीकृत होगा। यदि कोई बालक जन्म लेता है तो वह बालक उस परिवार का सदस्य होगा, जिस परिवार की उसकी मां पंजीकृत सदस्य होगी। यदि दस वर्ष से कम उम्र का बालक परिवार छोडता है या निकाला जाता है तो उसकी सम्पत्ति ग्राम सभा के पास अमानत होगी। उसकी व्यवस्था ग्राम सभा करेगी।
परिवार में किसी भी स्तर पर उम्र या लिंग का भेद नहीं होगा। परिवार का एक प्रमुख होगा जो परिवार में सबसे अधिक उम्र का व्यक्ति होगा । उसकी भूमिका राष्ट्र पति के समान होगी। प्रमुख के प्रस्ताव पर सभी सदस्य गुप्त मतदान द्वारा मुखिया का चुनाव करेंगे। अन्य नियम परिवार बनायेगा। मुखिया प्रमुख के नाम पर परिवार का संचालक होगा। परिवार जिन कार्यो को नही कर सकेगा अथवा जो कार्य किन्ही अन्य इकाइयों से संबंध रखेगे वे सब कार्य परिवार ग्राम सभा को दे देगा।
प्रत्येक परिवार पंजीकृत होगा। उसे एक कोड नम्बर दिया जायेगा, जो नौ अंकां का होगा। यह नम्बर परिवार की स्थाई पहचान होगी। इसी नम्बर पर उसके वैक एकाउंट न्यायालय के केश , पोस्ट आफिस का पता गाडी नम्बर फोन न0,आदि सारा लेखा जोखा रहेगा। मतदान सूची का नम्बर भी वही रहेगा। परिवार का प्रमुख एक होगा किन्तु यदि परिवार के कुछ सदस्य दूसरे गांव में रहते है तो प्रत्येक गांव में एक उप प्रमुख रहेगा । वह उप परिवार उस गांव में पंजीकृत होगा किन्तु सम्पत्ति सबकी संयुक्त रहेगी। कोड नम्बर इस प्रकार होगा कि पहले दो नम्बर लोक प्रदेश दूसरे दो लोक जिला, तीसरे दो ग्राम तथा अंतिम तीन अंक परिवार की पहचान करेंगे।

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