राहुल गांधी और नरेन्द्र मोदी की राजनैतिक समीक्षा-बजरंग मुनि

Posted By: admin on December 19, 2017 in Recent Topics - Comments: No Comments »

Rahul-Gandhi-Narendra-Modi
बचपन से ही मैं राममनोहर लोहिया के विचारों से प्रभावित होकर कांग्रेस विरोधी रहा। यह धारणा अब तक मेरी बनी हुई है। मेरे मन में यह बात भी हमेशा बनी रही कि भारत में सामाजिक चिंतन करने वालो का अभाव हो गया है और राजनैतिक दिशा में चिंतन और सक्रिय लोगों की बाढ आ गई है। सामाजिक चिंतन करने वाले तो खोजने से भी नहीं मिलते। इसलिए मैं निरंतर प्रयास करता हॅू कि सामाजिक दिशा में काम करने वाले व्यक्ति को प्राथमिकता दॅू।
गुजरात और हिमाचल के वर्तमान चुनाव संपन्न हुए । मेरी यह धारणा रही है कि नरेन्द्र मोदी वर्तमान समय में बहुत ही अच्छा काम कर रहे हैं। इस आधार पर मैं मानता रहा कि कुछ प्रतिबद्ध भाजपा विरोधी, कुछ अल्पसंख्यक समुदाय के लोग तथा कुछ कालेधन की अर्थव्यवस्था से प्रभावित लोगों को छोडकर कोई भी तटस्थ व्यक्ति नरेन्द्र मोदी की नीतियों के विरुद्ध वोट नहीं दे सकता। इस आकलन के आधार पर मैं कह सकता हॅू कि गुजरात में कांग्रेस पार्टी को बहुत अधिक वोट मिले जो मेरी व्यक्तिगत इच्दा के विपरीत रहे। एक बार तो जब 9 बजे करीब गुजरात और हिमाचल में कांग्रेस की बढत हुयी तो मैं दुखी हो गया था।
5 वर्ष पहले जब लोकसभा चुनाव शुरु भी नहीं हुए थे तभी मैंने लिखा था कि राहुल गांधी एक बहुत ही भले आदमी है। मुझे उनमें गांधी के गुण अधिक दिखे,नेहरु के कम। राहुल गांधी प्रायः झुठ नहीं बोल पाते। उनमें कुटनीतिक समझ का भी अभाव है। वे जनहित को जनप्रिय की अपेक्षा अधिक महत्व देते है। मेरी हार्दिक इच्छा थी कि राहुल गांधी राजनीति में न जाकर गांधी की दिशा में बढें मैंने इस संबंध में कई बार लेख भी लिखे और कई बार अपनी इच्छा भी व्यक्त की। यहाॅ तक कि मैंने सोनिया जी को भी अपने संदेश दिये किन्तु सोनिया जी ने राहुल की इच्छा के विरुद्ध उन्हें राजनीति में डाल दिया। अब मैं नहीं कह सकता कि राहुल गांधी राजनीति का कीचड साफ करने में सफल होंगे अथवा अरविंद केजरीवाल की तरह कीचड में ही रहने लायक स्वयं को बना लेंगे। क्या होगा यह भविष्य बतायेगा। गुजरात चुनाव से यह आभाश होता है कि राहुल गांधी अब तक अपनी शराफत पर कायम है।
कुल मिलाकर भारतीय राजनीति ठीक दिशा में जा रही है। नरेन्द्र मोदी एक सफल राजनेता के रुप में निरंतर आगे बढ रहे है। नीतिश कुमार बिल्कुल ठीक जगह पर है। राहुल गांधी भी अपनी दिशा टटोल रहे है। जिस तरह राहुल गांधी ने गुजरात में अल्पसंख्यक राजनीति को झटका दिया उससे आशा की किरण जगी है। मुझे तो लगता है कि दुखी होकर ही मणिशंकर अय्यर अथवा कपिल सिब्बल ने कुछ भिन्न सोचा होगा। कांग्रेस के एक प्रमुख कार्यकर्ता ने तो नाराज होकर राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा भी खोल दिया। इन सबसे पता चलता है कि राहुल गांधी ठीक दिशा में भी जा सकते है किन्तु उनकी राजनैतिक योग्यता कितनी विकसित होगी यह अभी पता नहीं है। एक तरफ नरेन्द्र मोदी सरीखा राजनीति का सफल खिलाडी तो दूसरी तरफ राहुल गांधी सरीखा राजनीति का असफल अनाडी। दोनों मैदान में आमने सामने उतर चुके है। कांग्रेस पार्टी के खूंखार लोग राहुल गांधी के पक्ष में स्वयं को कितना बदल पायेंगे यह पता नहीं किन्तु लालू प्रसाद, रामविलास पासवान, ममता बनर्जी, करुणा निधि सरीखे चालाक राजनेता अवष्य ही परेशान होंगे क्योंकि उन्हें न इस धडे से कोई विषेष प्रोत्साहन मिलेगा न ही उस धडे से। मैं इतना और सलाह देना चाहॅूगा कि हार्दिक ,जिग्नेश सरीखे उच्च श्रृंखल युवकों से राहुल गांधी को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि ये किसी भी दृष्टि से गंभीर लोग नहीं है। न इन्हें नैतिकता की चिंता है न इसकी कोई सामाजिक सोच है। जो लोग वर्तमान समय में इ भी एम पर सवाल उठा रहे है ऐसे लोगों से तो मुझे घृणा सी हो गई है चाहे वे अरविंद केजरीवाल सरीखे मेरे प्रिय ही क्यों न हो। इसलिए राहुल जी को ऐसे लोगों का उपयोग करने और प्रभावित न होने की कला सीखनी होगी।
अंत में मेरी इच्छा है कि नरेन्द्र मोदी और राहुल गांधी एक दूसरे के राजनीतिक विरोधी न होकर संतुलित प्रतिद्वंदिता तक सीमित हो जाये तो देश के लिए बहुत अच्छा होगा और यदि राहुल गांधी असफल होकर समाज सशक्तिकरण की दिशा में बढ जाये तब तो और भी अच्छा होगा।

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