सामयिकी

Posted By: admin on March 15, 2018 in Recent Topics - Comments: No Comments »

उत्तर प्रदेश के उपचुनावो मे गोरखपुर और फुलपुर मे स पा की जीत अप्रत्याशित थी। उतनी ही अप्रत्याशित जितनी विधानसभा चुनावों मे सपा की करारी हार थी। उस समय उनकी हार का वैसा अनुमान नही था और इस समय उनकी जीत का ऐसा अनुमान किसी को नही था। संभवतः चुनाव लडने वालों को भी नही।
यह स्पष्ट है कि इन चुनावों मे सपा की जीत नही हुई बल्कि भाजपा की हार हुई है।यह हार मोदी जी की हार है या योगी जी की अथवा जीत के प्रति अति आत्मविष्वास की यह अभी नही कहा जा सकता। चुनावों मे कार्यकर्ताओं की निस्वार्थ सक्रियता का बहुत महत्व होता है। लोकसभा से लेकर विधान सभा तक संघ परिवार ने जी जान से सक्रियता दिखाई थी। इन उप चुनावो मे संघ परिवार की सक्रियता लगभग नही के बराबर थी। यह निष्क्रियता क्यो थी यह शोध का विषय है। यह निष्क्रियता मोदी सरकार के विरूद्ध संध परिवार की नाराजगी भी संभव है या योगी सरकार के प्रति भी कोइ्र बात हो सकती है। यह निष्क्रियता अति आत्म विश्वास के कारण भी संभव है। मेरी जानकारी के अनुसार योगी जी मोदी जी तथा संध परिवार ने अपने अपने आधार पर इस तरह के आकलन कर लिये थे कि विपक्ष अब समाप्त हो रहा है और अब अलग अलग शक्ति संतुलन बनाने का समय आ गया है। इन सबकी गुप्त चर्चाए भी शुरू हो गई थी। इन गुप्त चर्चाओ के कारण भी कुछ समीकरण गडबड हो सकते है। जो भी हो किन्तु मुझे लगता है कि यह हार मोदी योगी और संघ परिवार के बीच किसी गडबड तालमेल का परिणाम अधिक दिखती है और बढे आत्म विश्वास की कम। इतना अवश्य है कि यह हार दो हजार उन्नीस मे मोदी जी को जीतने मे मददगार भी हो सकती है क्योकि यह एक अदृष्य भय के रूप मे बदल कर आपसी तालमेल और ठीक भी कर सकती है।

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