सामयिकी–बजरंग मुनि

Posted By: admin on May 6, 2018 in Recent Topics - Comments: No Comments »

मै एक आस्थावान हिन्दू हॅू और गांधी को स्वामी दयानंद के बाद का सर्वश्रेष्ठ महापुरूष मानता हॅू। मेरा सर्वोदय और संघ परिवार से निकट का संबंध है यद्यपि दोनो एक दूसरे के शत्रुवत है। कुछ मुददो पर मेरी दोनो से मत भिन्नता रही है। संघ परिवार येन केन प्रकारेण गांधी हत्या का औचित्य सिद्ध करने का प्रयास करता है। संघ कार्यकर्ता गोडसे की चर्चा करते समय अंत मे किन्तु परन्तु अवश्य लगाता है जबकि मै गोडसे के कार्य को पूरी तरह अवांछनीय मूर्खतापूर्ण और निन्दनीय मानता हॅू। मै तो गोडसे के कार्य का परोक्ष समर्थन भी निन्दनीय मानता हॅू। इसी तरह मेरे सर्वोदयी मित्र संघ परिवार का विरोघ करने के नाम पर नक्सलवाद तथा मुस्लिम आतंकवाद तक का समर्थन करते है। मेरे सर्वोदयी मित्र प्रोफेसर गिलानी की रिहाई पर उन्हे सम्मानित करते है तो अभी अभी पुलिस द्वारा मारे गये पचास नक्सलियो के प्रति अप्रत्यक्ष सहानुभूति व्यक्त करते है। मुझे आश्चर्य है कि एक विदेशी शासक माओ के हिंसक अनुयायी भारत मे अहिंसा के पुजारी गांधीवादियों की सहानुभूति कैसे प्राप्त कर लेते है। मै आश्वस्त हॅू कि चाहे मुस्लिम आतंकवाद हो अथवा नक्सली हिंसा कोई भी समझदार व्यक्ति इनका कभी समर्थन नही कर सकता किन्तु अंध संध विरोध तथा वामपंथियो से प्रभावित सर्वोदयी इन अवांछनीय हिंसक प्रयासो तक का समर्थन करते रहते है।
मै सार्वजनिक जीवन मे शत प्रतिशत अहिंसा का पक्षधर हॅू साथ ही मै सरकार का यह दायित्व समझता हॅू कि वह हिंसक गतिविधियो से समाज की सुरक्षा के लिये आवश्यक बल प्रयोग करे । पिछले कई वर्षो से कांग्रेस सरकार की ढूलमुल नीति के कारण नक्सलवाद बढा । अब नीतियां बदली है। समाज का काम हृदय परिवर्तन होता है और जो फिर भी नही मानता उसे नष्ट करना सरकार का कर्तब्य है।यदि गुमराह लोगो द्वारा की गई हिंसा के प्रति सहानुभूति व्यक्त की गई तो गोडसे भी तो गुमराह ही था। इसलिये दो भिन्न तर्क उचित नही । मेरे दोनो मित्र भले ही भिन्न भिन्न घटनाओ मे भिन्न भिन्न तर्क रखे किन्तु मेरे विचार से न गोडसे के कार्य का किसी प्रकार समर्थन उचित है न नक्सलवाद का।

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