इमानदारी ही मनमोहन सिंह की मुख्य समस्या |

Posted By: admin on October 2, 2012 in Uncategorized - Comments: No Comments »

 

मैंने पूर्व में कई बार लिखा है कि मनमोहन सिंह की इमानदारी ही वर्तमान राजनीतिक वातावरण की सबसे बड़ी समस्या है | जहाँ राजनीति और भ्रष्टाचार का चोली-दामन का सम्बन्ध हो, राजनीति एक व्यवसाय बन चुकी हो, वहां एक व्यक्ति अगर लीक से हट कर चलना चाहे तो वह आँख की किरकिरी बनेगा ही | मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल में किसी भ्रष्टाचार पर कोई अडंगा नहीं लगाया और जब भ्रष्ट लोग जेल जाने लगे तो उन्हें बचाने में भी कोई भूमिका अदा नहीं की | यह बात न राजनीतिक दलों को पसंद है न ही मीडिया को |

मैंने १९ सितम्बर के रामानुजगंज सम्मलेन में यह विश्वास व्यक्त किया था कि, मनमोहन सिंह के खिलाफ वातावरण बनाने में सोनिया जी और सुषमा स्वराज का समान हित है | कहीं-कहीं दोनों के बीच योजना पर सहमति भी संभव है, मेरे उक्त कथन पर कई लोगों ने प्रश्न भी खड़े किये, लेकिन मैं अपनी बात पर कायम था |

कल N.D.A के संयोजक शरद यादव ने बयान दे कर कहा है कि सोनिया गाँधी भारतीय सत्ता के लिए एक अच्छी प्रधानमंत्री होती | भारत में प्रधानमंत्री पद  मनमोहन सिंह की जगह पर सोनिया को दिया जाना अच्छा होता | स्पष्ट है कि शरद यादव जो भी बोलते हैं साफ़ बोलते हैं, लाग-लपेट नहीं करते, जबकि दूसरे लोग मन में कुछ और मुंह पर कुछ के आदी हैं | शरद यादव उस टीम के मुखिया हैं जिसकी सदस्य सुषमा स्वराज भी है | शरद यादव से B.J.P  यह प्रश्न क्यूँ नहीं करती, के आपने सोनिया गाँधी को इतना योग्य कैसे समझ लिया ? स्पष्ट है कि अंदर ही अंदर सारे राजनेता इस बात से दुखी हैं  मनमोहन सिंह की तटस्थ नीतियों ने सभी राजनेताओं के ढोंग की पोल खोल कर रख दी है |

मैं यह फिर से कहना चाहता हूँ, कि मनमोहन सिंह की इमानदारी ही उनकी सबसे बड़ी समस्या है, और राजनीति से जुड़े सभी लोग, चाहे वो मीडिया कर्मी हों या बड़े व्यापारी या राजनीति पोषित पत्रकार ही क्यूँ न हों, सब एक ही स्वर से मनमोहन सिंह के विरूद्ध वातावरण बनाने में सक्रिय हैं | शरद यादव के कथन से यह बात और स्पष्ट हो गयी है |

बजरंग मुनि…!

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