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विवाह पारंपरिक या स्वैच्छिक-बजरंग मुनि
कुछ स्वीकृत सिद्धान्त है 1 प्रत्येक महिला और पूरूष के बीच एक प्राकृतिक आकषर्ण होता है । यदि आकर्षण सहमति से हो तो उसे किसी परिस्थिति मे बाधित नही किया जा सकता, अनुशासित किया जा सकता है। इस अनुश...
मंथन क्रमांक 71 गरीबी रेखा-बजरंग मुनि
कुछ निश्चित निष्कर्ष प्रचलित हंैं। 1 कोई भी व्यक्ति न गरीब होता है न अमीर । गरीबी और अमीरी सापेक्ष होती है, निरपेक्ष नही। प्रत्येक व्यक्ति उपर वाले की तुलना मे गरीब होता है और नीचे वाले की तुल...
बजरंग मुनि
मंथन क्रमांक-70 सती प्रथा-बजरंग मुनि
समाज मेें कुछ निष्कर्ष प्रचलित हैं- 1 समाज मेें प्रचलित गलत प्रथायें अथवा परम्पराएं धीरे धीरे समाज द्वारा स्वयं ही लुप्त कर दी जाती हैं। राज्य को इस संबंध में कभी कोई कानून नहीं बनाना चाहिए। 2...
भूत-प्रेत, तंत्र-मंत्र, जादू-टोना-बजरंग मुनि
कुछ मान्य सिद्धान्त है। 1 धर्म और विज्ञान एक दूसरे के पूरक होते है वर्तमान समय मे इन दोनो के बीच संतुलन बिगड गया है। 2 जो कुछ प्राचीन है वही सत्य है ऐसा अंध विश्वास ठीक नही। जो कुछ प्राचीन है व...
मंथन क्रमांक 66 -हिन्दू कोड बिल
कुछ मान्य सिद्धांत प्रचलित हैः- 1 व्यवस्था तीन के संतुलन से चलती है-1 सामाजिक 2 संवैधानिक 3 आर्थिक। यदि संतुलन न हो तो अव्यवस्था निश्चित है। वर्तमान समय में संवैधानिक व्यवस्था ने अन्य दो को गुल...
मंथन क्रमांक 65 भारत की प्रस्तावित संवैधानिक व्यवस्था-बजरंग मुनि
कुछ सर्वस्वीकृत सिद्धांत हैं- (1) व्यवस्था कई प्रकार की होती हैं-(1) सामाजिक (2) संवैधानिक (3) आर्थिक (4) धार्मिक (5) विश्व स्तरीय। भारत में राजनैतिक व्यवस्था ने अन्य सभी व्यवस्थाओं पर अपना एकाधिकार कर...
राहुल गांधी और नरेन्द्र मोदी की राजनैतिक समीक्षा-बजरंग मुनि
बचपन से ही मैं राममनोहर लोहिया के विचारों से प्रभावित होकर कांग्रेस विरोधी रहा। यह धारणा अब तक मेरी बनी हुई है। मेरे मन में यह बात भी हमेशा बनी रही कि भारत में सामाजिक चिंतन करने वालो का अभाव ...

राज ठाकरे और इतिहास के सबक

Posted By: admin on May 6, 2010 in Uncategorized - Comments: No Comments »

जब भी किसी तात्कालिक उद्देश्य के लिये आवंछित लोगों को आगे बढाया जाता है तब उसके घातक परिणाम स्वयं को ही भुगतने पडते है। स्वतन्त्रन्ता के पूर्व संघ परिवार मे गाधीं जी के विरूद्ध जो वातावरण बना था वह संघ परिवार के नियन्त्रण से बाहर हो गया । परिणाम स्वरूप संघ परिवार की कोई  योजना न होते हुए भी गांधी जी की हत्या हो गई।

अमेरिका ने रूस को अफगानिस्तान से बाहर करने के उद्देश्य से लादेन को सशक्त किया था। लादेन अमेरिका के नियन्त्रण से बाहर हुआ और परिणाम आप सबके सामने है। इंदिरा जी ने सिख राजनीति से परेशान होकर सन्त भिण्डरा वाले को खडा किया। परिणाम सबके सामने है। आपरेशन ब्लूस्टार भी करना पड़ा और इन्दिरा जी की जान भी चली गई। इसी तरह राजीव गांधी ने श्रीलंका को अस्थिर करने हेतु प्रभाकरण को पाल पोसकर बड़ा किया था । प्रभाकरण भी राजीव गांधी का काल बन गया । इतिहास ऐसी अनेक घटनाओ से भरा पड़ा है । भले ही हम इतिहास से कोई अनुभव न प्राप्त करें।

वर्तमान कांग्रेस पार्टी शिवसेना को किसी तरह कमजोर करना चाहती थी उसने फिर से उसी भूल का सहारा लिया । राज ठाकरे को काग्रेस ने जिन्दा किया । जब राज ठाकरे बाल ठाकरे को कमजोर कर रहे थे और शिव सेना का मुद्दा छीन रहे थे तब कांग्रेस पार्टी की प्रसन्नता देखते ही बनती थी। हर कांग्रेसी इसी कार्य को अपनी बहुत बड़ी कामयाबी समझ रहा था । अब राज ठाकरे कांग्रेस से हटकर अलगाव की भाषा बोलने लगे है। बाल ठाकरे और राज ठाकरे के बीच मराठी जन भावना को उभारने की प्रतिस्पर्धा इस सीमा तक चली जायेगी कि महाराष्ट्र को भारत से अलग होने तक की आवाज उठने लगे तब कांग्रेस पार्टी की चिन्ता बढ़ी है। बाल ठाकरे शरीर से भी बुढ़े हो गये है और प्रतिष्ठा से भी । संघ परिवार को भी कुछ अकल आ गई है किन्तु राज ठाकरे जवान भी है और उभरती हुई ताकत भी । कांग्रेस के समक्ष कुऑ और खाई की स्थिति बनती जा रही है। यदि राज ठाकरे थोड़ा भी और अधिक शक्तिशाली हुआ तो वह किसी भी सीमा तक जा सकता है। न कांग्रेस उसे रोक सकेगी न ही देश की और ताकत। ऐसी स्थिति भयावह होगी और उसका क्या परिणाम होगा यह अभी बताना सम्भव नही । किन्तु इतना अवश्य बताया जा सकता है  कि परिणाम न देश के हित मे होगा न ही कांग्रेस पार्टी के हित में।

महापुरूषो की इस बात का हमेशा ख्याल रखना चाहिये कि तात्कालिक उद्देश्यों के लिये अवांछित तत्वों को प्रोत्साहन हमेशा कष्टकारक ही होते है।

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